लाहौर, 14 अक्टूबर 09
समिति एक तरफ तो पाकिस्तानी टीम के कप्तान यूनुस खान और कोच इंतिखाब आलम पर लगा मैच फिक्सिंग का आरोप निराधार बताती है, वहीं दूसरी ओर क्रिकेटरों पर मैच फिक्सिंग में शामिल होने का खुलेआम आरोप लगाने वाले समिति के अध्यक्ष जमशेद दस्ती खिलाड़ियों की मीडिया से बातचीत से खफा हैं। समिति को डर है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप से वे खुद ही न फंस जाएं। यही कारण है कि उन्होंने बौखलाहट में पीसीबी को खिलाड़ियों पर अंकुश लगाने की नसीहत भी दे डाली है।
एक तरफ तो दस्ती खुलेआम यह कहते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान पाकिस्तानी टीम का न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से मैच हारना पहले से ही तय था। दस्ती की मानें, तो इस बात के उनके पास पुख्ता सबूत हैं। वहीं, दूसरी ओर उनकी ही समिति ने मैच फिक्सिंग के आरोप निराधार बताया है। समिति ने कहा है कि इस बात को साबित करने के लिए किसी के पास कोई सबूत नहीं है। तो, फिर समिति ने चैंपियंस ट्रॉफी में टीम की हार के बाद यूनुस, आलम और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष एजाज बट को कारण बताओ नोटिस के साथ तलब क्यों किया था।
जब पाक समिति ने देखा कि उनका यह ड्रामा खुद उन पर ही भारी पड़ रहा है तब उसने एक नया शगूफा छोड़ते हुए कहा, 'अपने देश की सरकार के इशारे पर भारतीय मीडिया पाकिस्तानी क्रिकेट की तस्वीर खराब करने के लिए बड़े पैमाने पर षड्यंत्र कर रहा है।' इसे समिति में शामिल सदस्यों की मूर्खता कहे या यूसुफ के इस्तीफे के बाद उनकी अस्थिर मानसिक स्थिति की उन्होंने अंपायर साइमन टाफेल के अंपायरिंग के स्तर पर भी अंगुली उठा दी। |