सेंचुरियन, 3 अक्टूबर 09
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम कप्तान रिकी पोंटिंग को 'बिग मैच प्लेयर' कहा जाता है। वैसे तो वे लगातार शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन जब बात बड़े मुकाबलों की आती है, तो पंटर का बल्ला और ज्यादा निखर जाता है। फिर चाहे वो विश्व कप 2003 का फाइनल रहा हो या चैंपियंस ट्रॉफी 2009 का सेमीफाइनल।
पोंटिंग ने शुक्रवार को चैपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में अपनी इसी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके बल्ले से निकली 111 रनों की पारी इस महान बल्लेबाज के स्तर को खुद बयां कर गई। दूसरी छोर से शेन वाटसन ने भले ही तेज 136 रन बनाए हों, लेकिन पोंटिंग की पारी ने कुछ और संकेत दिया। यह पारी आस्ट्रेलियाई प्रांत तस्मानिया के इस बल्लेबाज की महानता की गवाह है।
मौजूदा चैम्पियंस ट्रॉफी में भी पंटर का बल्ला जमकर बोल रहा है। इस टूर्नामेंट में अब तक खेले चार मैचों में वह 95.66 की शानदार औसत से 287 रन बना चुके हैं। इसमें सेमीफाइनल में उनकी शतकीय नाबाद पारी भी निहित है। इस टूर्नामेंट के आरंभ होने से पहले आस्ट्रेलियाई टीम ने इंग्लैंड को उसकी सरजमीं पर ही 6-1 से मात दी थी। टीम की इस बेहतरीन कामयाबी में पंटर का अहम योगदान रहा।
क्रिकेट का महाकुंभ कहे जाने वाले विश्व कप के मैचों में तो पोंटिंग के प्रदर्शन का कोई सानी नहीं है। वर्ष 1995 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले पोंटिंग वर्ष 1996 से अब तक चार विश्व कप खेल चुके हैं। चारों विश्व कप के दौरान उन्होंने कुल 39 मैच खेले हैं और इनमें उन्होंने 48.03 की औसत से 1,537 रन बनाए हैं।
वर्ष 2003 और 2007 का विश्व कप आस्ट्रेलिया ने पोंटिंग के नेतृव में जीता था। 2003 विश्व कप के फाइनल में पोंटिंग की पारी को शायद ही कोई भारतीय भूल पाया हो। उस मैच में पोंटिंग के बल्ले 140 रन निकले थे और उसमें आठ छक्के शामिल थे। उनकी उस पारी ने भारतीय टीम के दोबारा विश्व कप जीतने के अरमानों पर पानी फेर दिया था।
गौरतलब है कि आस्ट्रेलियाई कप्तान अब तक कुल 323 एकदिवसीय मैच खेल चुके हैं। इनमें उन्होंने 43.32 की औसत से 12,043 रन बनाए हैं जिनमें 28 शतक शामिल हैं। शतकों और रनों की लिहाज से सिर्फ मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ही उनसे आगे हैं। |