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फिर साथ-साथ गांगुली और डालमिया!
भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली फिर करीब आ रहे हैं। अगर आने वाले समय में दोनों फिर से बंगाल क्रिकेट के प्लेटफॉर्म पर साथ दिखें, तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए। खबर ये भी है कि गांगुली को डालमिया कैब में बड़ी जिम्मेदारी देने का भी मन बना चुके हैं।
गांगुली-डालमिया: दूरियां अब नजदीकियां बन गईं

रत्ना श्रीवास्तव

कोलकाता में 31 जुलाई को सालाना आम बैठक (एजीएम) के दौरान और उससे दो दिन पहले कैब की एक मीटिंग में साफ दिखा कि सौरव और डालमिया के बीच की दूरियां खत्म हो रही हैं। गौरतलब है कि डालमिया फिर निर्विरोध तरीके से कैब के अध्यक्ष बन गए हैं। इसके साथ ही ये भी साफ हो गया है कि बंगाल क्रिकेट में उनकी पकड़ खासी मजबूत है।

डालमिया का अध्यक्ष चुना जाना तभी तय हो गया था, जब उनके खिलाफ कोई भी प्रत्याशी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में नहीं उतरा। हालांकि, पहले ये माना जा रहा था कि सौरव गांगुली कैब के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए खुद की दावेदारी पेश कर सकते हैं। लेकिन, बाद में सौरव दौड़ से हट गए और डालमिया की राह पूरी तरह से साफ हो गई।

इसके बाद सौरव और डालमिया ने दोनों ने एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। जहां गांगुली ने हाल के बयानों में उन्हें महान क्रिकेट प्रशासक बताया है, वहीं डालमिया ने भी गांगुली के प्रशासक के रूप में पारी शुरू करने का स्वागत किया है।

गौरतलब है कि सौरव के क्रिकेट करियर में डालमिया की एक बड़ी भूमिका रही है। एक समय वह भी था, जब डालमिया को सौरव के गॉडफादर के तौर पर देखा जाता था। लेकिन, डालमिया का ग्राफ नीचे आने के साथ ही दोनों के बीच फासले आ गए। अब दोनों फिर नजदीक आ रहे हैं।

जब कुछ दिनों पहले सौरव गांगुली ने क्रिकेट प्रशासक के तौर पर कैब में आने की इच्छा जाहिर की थी, तो उसे डालमिया को चुनौती के रूप में देखा गया था। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। लिहाजा, कोलकाता में कैब की एजीएम में सौरव गांगुली जरूर आकर्षण का केंद्र बने रहे। वे मोहम्मडन स्पोर्टिंग के प्रतिनिधि के रूप में इसमें शामिल हुए। इसके साथ ही प्रशासक के तौर पर क्रिकेट में उनकी दूसरी पारी का भी आगाज हो गया।

इस मीटिंग में डालमिया उनसे गर्मजोशी के साथ मिले। एजीएम से दो दिन पहले भी कैब की एक मीटिंग में डालमिया ये संकेत दे चुके थे कि सौरव के प्रति वो अब भी सॉफ्ट कार्नर रखते हैं। तब डालमिया ने पहली बार कहा- ‘सौरव तो हमारे अपने हैं, वो अगर कैब में आना चाहते हैं, तो स्वागत है।’ डालमिया ने यहां तक कह डाला कि अगर सौरव कैब में आना चाहते हैं, तो इसमें बुरा क्या है! इसे गलत क्यों माना जाये! जो लोग इसे लेकर विवाद पैदा कर रहे हैं, उन्हें बाज आना चाहिए। स्वाभाविक है कि डालमिया की इन बातों से मीटिंग में आए लोग हैरान हुए होंगे।

माना जा रहा है कि डालमिया पूर्व भारतीय कप्तान को बंगाल क्रिकेट समिति का प्रमुख बनाना चाहते हैं ताकि बंगाल क्रिकेट को बेहतर शक्ल दी जा सके। डालमिया बंगाल में अलग-अलग आयुवर्ग के लिए कई क्रिकेट प्रोग्राम चलाना चाहते हैं, जिसमें सौरव की एक अहम भूमिका होगी।

डालमिया के खास सिपहसलारों ने भी एजीएम और इससे पहले सौरव का जिस अंदाज में गुणगान किया, उससे भी लगता है कि बंगाल क्रिकेट में नए समीकरण उभर रहे हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स टीम में गांगुली की फिर से कप्तान के रूप में वापसी के बाद कयास ये भी हैं कि डालमिया-सौरव-शाहरुख खान की तिकड़ी के रूप में बंगाल क्रिकेट में एक नया पावर सेंटर बनने वाला है। कुछ दिन पहले ही जिस अंदाज में सौरव ने बीसीसीआई को आड़े हाथों लिया था, उससे लगता है कि सौरव शायद अब डालमिया के साथ मिलकर अपनी आगे की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं।

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