| नई दिल्ली:
आज 28 जुलाई के दिन क्रिकेट जगत के बेहतरीन ऑलराउंडर माने जाने वाले गारफील्ड सोबर्स का जन्मदिन है। सोबर्स को एक सम्पूर्ण क्रिकेटर कहा जाता है। वे न सिर्फ एक बेहरतीन बल्लेबाज थे, बल्कि गेंदबाजी में भी वे लाजवाब थे। बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दम पर लंबे समय तक क्रिकेट जगत में राज करने वाले वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी सर गारफील्ड सोबर्स सही मायने में टेस्ट क्रिकेट के संपूर्ण आलराउंडर थे।
बारबाडोस के सेंट माइकल में 28 जुलाई 1936 को जन्में सोबर्स एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे। इसके साथ ही वे बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी भी करते थे और साथ ही बाएं हाथ से स्पिन गेंदबाजी भी करते थे। यही नहीं सोबर्स चाइनामैन गेंदबाजी भी करते थे। फील्डिंग में भी सोबर्स ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
आंकड़े खुद ही उनकी कामयाबी की दास्तां बयां करते हैं। वेस्टइंडीज के लिए 93 टेस्ट में 57.78 की बेहतरीन औसत से 8032 रन बनाने वाले सोबर्स के नाम 34.03 की औसत से 235 विकेट भी हैं। यह उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे सफल आलराउंडर बनाता है। उनके नाम 26 शतक और 30 अर्धशतक दर्ज हैं। उन्होंने प्रथम श्रेणी में भी 383 मैचों में 54.87 की औसत से 28 हजार से अधिक रन बनाए।
सोबर्स एक ऐसे खिलाड़ी रहे जिनकी प्रतिभा के कायल न सिर्फ उनकी टीम के खिलाड़ी ही थे, बल्कि विरोधी भी उनकी तारीफ किये बिना नहीं रह सके। उन्होंने भी इस इस दिग्गज की क्षमता की खूब तारीफ की। उनके समकालीन क्रिकेटर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिची बेनो ने उन्हें 'विश्व क्रिकेट का महानतम ऑलराउंडर' करार दिया। बैनो ने कहा कि सोबर्स बेजोड़ बल्लेबाज, बेहतरीन क्षेत्ररक्षक और असाधारण कौशल का धनी गेंदबाज है, फिर चाहे नई गेंद से गेंदबाजी की बात हो या फिर बाएं हाथ की आर्थोडाक्स स्पिन या फिर रिस्ट स्पिन।' सोबर्स के धुर विरोधी रहे इंग्लैंड के फ्रेड ट्रूमैन ने उन्हें बाद में बाएं हाथ का बेजोड़ बल्लेबाज कहा जो 'खेल से जुड़ने वाले महानतम क्रिकेटरों में से एक है और निश्चित तौर पर महानतम आलराउंडर है।'
सोबर्स एक बेजोड़ एथलीट थे। उनकी प्रतिभा सिर्फ क्रिकेट के मैदान पर ही नहीं सिमटी रही, बल्कि अन्य खेलों में भी सोबर्स ने अपनी मौजूदगी का अहसास दर्ज कराई। दरअसल, सोबर्स एक ऐसी शख्सियत का नाम है, जो जहां जाता है अपने साथ एक आभामंडल लेकर चलता है। उन्होंने बारबडोस के लिए क्रिकेट के अलावा गोल्फ, फुटबाल और बास्केटबाल भी खेली।
सोबर्स ने जब क्रिकेट खेलना शुरू किया, तो उन्हें बतौर गेंदबाज जाना जाता था। मात्र 16 बरस की उम्र में प्रथम श्रेणी खेला और इसके एक साल बाद मार्च 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ वे वेस्टइंडीज की टेस्ट टीम का हिस्सा थे। वेस्टइंडीज के इस दिग्गज बल्लेबाज ने अपने करियर के दौरान कई रिकार्ड दर्ज किए। जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 365 रन की पारी भी शामिल है जो लंबे समय तक सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत टेस्ट पारी रही।
सोबर्स की उपलब्धियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। वे सिर्फ एक कुशल बल्लेबाज ही नहीं थे, बल्कि आक्रामक बल्लेबाजी में भी वे लाजवाब थे। पांच फुट 11 इंच लंबे सोबर्स प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने। उन्होंने इंग्लिश काउंटी में नाटिंघमशर की ओर से ग्लेमोर्गन के खिलाफ खेलते हुए मैल्कम नैश की गेंदों पर यह उपलब्धि हासिल की।
इसके साथ ही उन्होंने एक ओवर में 36 रन बनाकर सर्वाधिक 34 रन के 57 साल पुराने पिछले रिकार्ड को भी तोड़ा। इसके बाद में भारतीय बल्लेबाज रवि शास्त्री ने बड़ौदा के खिलाफ बंबई की ओर से खेलते हुए सोबर्स के इस रिकॉर्ड की बराबरी की।
दुनिया भर में सोबर्स की उपलब्धियों को सराहा गया। सोबर्स के क्रिकेट के प्रति योगदान को देखते हुए फरवरी 1975 में ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें 'नाइटहुड' से सम्मानित किया। सोबर्स को 1964 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर और 2000 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी भी चुना गया। साल 1998 में प्रधानमंत्री ओवेन आर्थर ने उन्हें 'नेशनल हीरो ऑफ बारबाडोस' बनाया।
वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी का अनावरण किया। इसमें आईसीसी हर वर्ष अपने साल के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर को देता है। इस ट्रॉफी के लिए सोबर्स के नाम की सिफारिश रिची बेनो, सुनील गावस्कर और माइकल होल्डिंग के पैनल ने की जिन्हें आईसीसी ने ऐसे शख्स का नाम चुनने की जिम्मेदारी सौंपी थी जिसके नाम पर क्रिकेट का सबसे बड़ा व्यक्तिगत पुरस्कार दिया जा सके।
लेकिन सोबर्स एक इतनी बड़ी शख्सियत का नाम है जिसके सामने कोई भी पुरस्कार या ट्रॉफी मायने नहीं रखती। सोबर्स एक युग का नाम है, एक युगपुरुष का नाम है। |