कहा जाता है कि जब मुकाबला बड़ा होता है, तो बड़े खिलाड़ी अपने स्तर को और ऊंचा उठा लेते हैं। रिकी पोंटिंग इस कसौटी पर बिल्कुल खरे उतरते हैं। चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई उनकी शतकीय पारी इस बात की बानगी भर है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली फिर करीब आ रहे हैं। अगर आने वाले समय में दोनों फिर से बंगाल क्रिकेट के प्लेटफॉर्म पर साथ दिखें, तो ताज्जुब नहीं होना चाहिए। खबर ये भी है कि गांगुली को डालमिया कैब में बड़ी जिम्मेदारी देने का भी मन बना चुके हैं।
टेस्ट क्रिकेट में 8 हजार से ज्यादा रन, 235 विकेट, एक पारी में 365 रन जो एक लंबे समय तक रिकॉर्ड रहा। प्रथम श्रेणी में एक ओवर में छह छक्के। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज, स्पिनर और चाइनामैन। हम यहां कई खिलाडि़यों की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि यहां एक ऐसे खिलाड़ी की हो रही है जो अपने आप में एक संपूर्ण व्यक्ितत्व है। कोई संदेह नहीं कि सर गारफील्ड सोबर्स को टेस्ट क्रिकेट का सर्वकालीन सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर कहा जाता है।
बांग्लादेश जैसी कमजोर टीम के हाथों अपने ही घर में दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से शर्मनाक पराजय। वेस्टइंडीज क्रिकेट ने अपने लंबे इतिहास में इससे बुरे दिन नहीं देखे होंगे। दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह है वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड और खिलाडि़यों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद।
कुछ समय पहले हुई आस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज की बात करें या मौजूदा बांग्लादेश-वेस्टइंडीज या श्रीलंका-पाकिस्तान टेस्ट सीरीज, हर जगह स्टेडियम सूने पड़े हैं। आंकडे गवाह हैं कि अस्सी के दशक के बाद टेस्ट मैचों में न केवल दर्शकों की संख्या तेजी से गिरी है, बल्कि अब टेस्ट का दर्जा हासिल देशों के लिए ये मैच घाटे का सौदा बनकर रह गए हैं। इंटरनेशनल मार्केटिंग की रिपोर्ट कहती है कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को छोड़कर भारत, वेस्टइंडीज सहित कई देशों में टेस्ट की लोकप्रियता तेजी से घटी है।
ऑस्ट्रेलिया को वॉर्न की कमी पूरी करना काफी मुश्किल हो रहा है। दूसरी और मुथैया मुरलीधीन अभी भी खेल रहे और श्रीलंका में स्पिनर्स का मानसून नजर आ रहा है। अजंता मेंडिस और रंगना हैराथ ने मैच जिताऊ प्रदर्शन कर मुरलीधरन के उत्तराधिकारी होने का दावा पेश कर दिया है।
चाहे गिलक्रिस्ट अपनी आत्मकथा लिखें या बुकानन अपनी किताब, वो भारत और भारतीय क्रिकेटरों के संदर्भ देना नहीं भूलते। बुकानन की किताब से कुल मिलाकर यही संकेत मिलता है कि भारतीय क्रिकेटरों को लेकर उन्होंने अपने दिमाग मे कुछ पूर्वाग्रह और चिढ़ सी पाल रखी है, जिसे उन्होंने अपनी किताब के जरिए जाहिर किया है।
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच जब भी एशेज सीरीज शुरू होती है, बॉडी लाइन सीरीज की यादें भी जेहन में दस्तक देने लगती हैं। ये वो सीरीज थी, जिसमें एक नई तरह की खौफनाक बॉलिंग प्रयोग की शुरुआत की गई थी। इस सीरीज से ये भी पता चलता है कि एशेज सीरीज के लिए इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच किस कदर प्रतिद्वंद्विता चलती है।
प्रतिष्ठित ऐशेज सीरीज ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच शुरू हो रही है। यह टेस्ट मैचों की सबसे प्रतिष्ठित सीरीज है। यह महज एक टेस्ट सीरीज नहीं है, बल्कि उस जज्बे का प्रतीक है जो एक हार पर एक पत्रकार ने पैदा किया था।
कहां ये माना जा रहा था कि पाकिस्तानी टीम के टी-20 चैंपियन बनने से वहां क्रिकेट की रंगत बदलेगी, देश की क्रिकेट को नई दिशा और रंगत मिलेगी, वो पटरी पर लौट सकेगी, लेकिन हो रहा है उलटा। जीत के बाद स्थितियां बेहतर होने के बजाए बदतर ही होती नजर आ रही हैं।